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Saturday, October 3, 2026
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ढोल दमाऊ की थाप और सांस्कृतिक रंगोली के साथ उत्तराखंड की नौनी सोसाइटी ने मनाया पारंपरिक पर्व इगास

उत्तराखंड की नौनी सोसाइटी और इंस्पिरेशन पी.आर. एन इवेंट्स द्वारा देहरादून में पारंपरिक पर्व ‘इगास’ के उपलक्ष्य में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। नेहरू कॉलोनी के निकट होटल एनजे पोर्टिको में आयोजित इस उत्सव में उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने जीवंत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें ढोल दमाऊ की थाप के साथ राज्य की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखी।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अपनी संस्कृति को सजीव बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस तरह के आयोजनों की उच्च प्रशंसा की। स्टेट वियर हाउस की एमडी रमिंद्री मंद्रवाल ने युवाओं को लोकपर्वों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त, दून इंटरनेशनल स्कूल के फाउंडर डीएस मान ने इस आयोजन की सराहना की। लोकगायक सौरभ मैठाणी ने अपनी मधुर गीतों के साथ माहौल को उत्सवी बनाया और अपनी संस्कृति के प्रति गहरा लगाव व्यक्त किया।
फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड 2022, ऐश्वर्या बिष्ट ने बताया कि वह मॉडलिंग के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

समाजसेवी कुश वालिया ने कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने में सहायक होते हैं। प्रसिद्ध डांसर तृप्ता कुकरेती ने इस पहल की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में ‘अपना घर अनाथ आश्रम’ के बच्चों ने भी मनमोहक सांस्कृतिक प्रदर्शनों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, इसके बाद अदम्य और दिव्यांशी ने गढ़वाली गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। दिवाली क्वीन और डांसिंग क्वीन प्रतियोगिताओं ने उत्साह को और बढ़ाया, जहां प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। दर्शकों के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन भी किया गया।

इस आयोजन में एमडीडीए, दून इंटरनेशनल, वीएलसीसी, नमकवाली, हिमालया ट्री और युवा हिमालया जैसी संस्थाओं ने विशेष सहयोग प्रदान किया। मंच का संचालन शिक्षिका और राज्य आंदोलनकारी मनीषा रावत ने बखूबी संभाला। इस अवसर पर नौनी सोसाइटी की अध्यक्ष नलिनी गोसाईं सहित कोषाध्यक्ष प्रियंका गिरी, मोनिका डोभाल, शकुंतला देवी और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

यह कार्यक्रम न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम बना, बल्कि युवाओं में अपनी जड़ों के प्रति गर्व और जागरूकता भी बढ़ाई, जिससे लोक संस्कृति का संरक्षण और प्रसार सुनिश्चित होगा।

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